काठमाडौं। वेद, महाभारत, उपनिषद् र १८ पुराण मानव सभ्यताकै इतिहासमा निकै महत्वपूर्ण मानिन्छन्। वैदिक दर्शनका दृष्टिले समेत यिनीहरुको विश्वव्यापी ख्याति रहँदै आएको छ।
वेद, महाभारत र पुराणहरु वैदिक दर्शन र हिन्दू धर्मसँग मात्र सम्बन्धित नभएर मानव जातिको इतिहास र प्राकृतिक दर्शन एवं ज्ञानसँग पनि सम्बन्धित छन्। यहाँ हामीले १८ पुराणमा रहेका श्लोक संख्याबारे जानकारी प्रस्तुत गरेका छौं।
१. ब्रह्म पुराण, श्लोक संख्या – १०,०००
२. पद्य पुराण, श्लोक संख्या – ५५,०००
३. विष्णु पुराण, श्लोक संख्या – २३,०००
४. शिव पुराण, श्लोक संख्या – २४,०००
५. भविष्य पुराण, श्लोक संख्या – १४,५००
६. लिङ्ग पुराण, श्लोक संख्या – ११,०००
७. स्कन्द पुराण, श्लोक संख्या – ८१,०००
८. वामन पुराण, श्लोक संख्या – १०,०००
९. ब्रह्माण्ड पुराण, श्लोक संख्या – १२,०००
१०. भागवत पुराण, श्लोक संख्या – १८,०००
११. नारद पुराण, श्लोक संख्या – २५,०००
१२. मार्कण्डेय पुराण, श्लोक संख्या – ९,०००
१३. अग्नि पुराण, श्लोक संख्या – ५,४००
१४. ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्लोक संख्या – १८,०००
१५. वराह पुराण, श्लोक संख्या – २४,०००
१६. कूर्म पुराण, श्लोक संख्या – १७,०००
१७. मटस्थ पुराण, श्लोक संख्या – १४,०००
१८. गरुड पुराण, श्लोक संख्या – १९,०००
अठार पुराणका रचयिता वेदव्यास हुन्। १८ पुराणको सार खिच्दै व्यासले लेखेका छन्, ‘अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम्। परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम्।।’ अर्थात् अठार पुराणमा व्यासले जम्मा २ कुरा भनेका छन्, परोपकार परे पुण्य मिल्छ, अरुलाई दुख दिए पाप।



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